रामपुर का लाल रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा: बेहतर भविष्य का सपना देख गया था शावेज, अब तिरंगे में लिपटा आया शव

रामपुर का लाल रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा: बेहतर भविष्य का सपना देख गया था शावेज, अब तिरंगे में लिपटा आया शव

Rampur Son Falls Victim to the Russia-Ukraine War

Rampur's Son Falls Victim to the Russia-Ukraine War

Rampur's Son Falls Victim to the Russia-Ukraine War, उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले का शख्स रोजगार के लिए रूस गया था, लेकिन एजेंट ने युद्ध में धकेल दिया. अब उसका शव गांव पहुंचा है. जब वह युद्ध क्षेत्र में था तो उसने घर वालों को फोन भी किया और मदद की गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई न हुई. अब वह युद्ध में लड़ते हुए मारा जा चुका है. जब शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया. उसके परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल है और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. 

बढ़िया सैलरी के नाम पर गया था रूस

रामपुर में शावेज (22) लोहे का कारीगर था और वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन उसका एजेंट अच्छी नौकरी और बढ़िया सैलरी दिलाने के नाम पर रूस ले गया, जहां युद्ध लड़ने को भेज दिया. वह करीब 9 महीने पहले अपने परिवार का सहारा बनने के इरादे से रूस गया था. वह वहां स्टील फर्नीचर का काम करने लगा था. घरवालों को उम्मीद थी कि शावेज विदेश में काम करके उनकी आर्थिक स्थिति सुधार देगा, लेकिन रूस पहुंचने के महज 2 महीने बाद ही हालात बदल गए. आरोप है कि उसे जबरन रूस की सेना के साथ युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया.

युद्ध में शामिल होने के बाद सीधे मौत की खबर आई

परिवार का कहना है कि शावेज ने फोन पर बताया था कि उसे मजबूरी में युद्ध क्षेत्र में जाना पड़ रहा है और वह वापस आना चाहता है, लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं था. इसी बीच युद्ध के दौरान शावेज को गोली लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई. यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया. माता-पिता और परिजन गहरे सदमे में हैं. शावेज का पार्थिव शरीर रूस से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया. वहां से शव रामपुर पहुंच गया, जहां पूरे गांव में शोक का माहौल है.

15 जून को गया था रूस

इस विषय पर शावेज के भाई साहबजादे ने बताया कि 15 जून 2025 को भाई रूस गया था. जब वहां पहुंच गया तो अच्छे से रह रहा था. हमारी बात भी होती थी, लेकिन जिस दिन से उसने यह खबर दी कि मैं आर्मी जॉइन कर रहा हूं तो सिर्फ हमारी दो या तीन दिन बात हुई, वो भी रिकॉर्डिंग के जरिए. 5 सितंबर को मेरे भाई से आखिरी बार बात हुई थी. वो भी उसने आवाज की रिकॉर्डिंग भेजी थी. उस दिन से आज 7 या 8 महीने हो गए, कोई बात नहीं हुई थी.

हमें दो दिन पहले एक कॉल आई तो पता चला कि भाई की आर्मी में मौत हो गई. जब पूछा गया कि कब हुई तो बताया कि 12 सितंबर को हुई थी. 7 महीने बाद घटना की जानकारी देने की वजह पूछा तो बताया कि जिस नंबर पर लाश आ रही है, वैसे बताया जा रहा है.

मां ने क्या बताया

शावेज की मां नभूरी ने बताया कि 10 महीने पहले बेटा रूस गया था. 2 महीने हॉस्टल में रहा तो वीडियो कॉल पर बात होती थी. फिर किसी ने बहका दिया. उसे बताया कि ₹50 लाख रुपये की सैलरी देंगे. यह बाद हमें नहीं बेटे ने नहीं बताई. डॉक्यूमेंट मंगा कर वहां का खाता भी खुलवाया, जिसके बारे में किसी को नहीं बताया.